Thursday, 14 April 2016

pyar mohabbat ki shayari in hindi

pyar mohabbat ki shayari in hindi


 तेरे गरजने से एक ख़ौफ़ सा पैदा होता हेै दिल में…एै बादल,,
तू…बे-आवाज़ बरस लिया कर मेरे आँसुओं की तरहा..

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दिखा के ख्वाब सुरख़ाब के 
सुरखा़ब के पर कतर दिये

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वो चाहते  है हम उनकी  तारीफ़  मे कुछ  कहे...  
हम ये जानते  है कि..  वो बिन बोले ही सब समझ  गए 

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रोक कर बैठा हूँ ज़िन्दगी को,
की तुम आओगी तो जीना शुरू कर देंगे !!

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सियासी आदमी की शक्ल तो प्यारी निकलती है;
मगर जब गुफ़्तगू करता है चिंगारी निकलती है;
लबों पर मुस्कुराहट दिल में बेज़ारी निकलती है;
बड़े लोगों में ही अक्सर ये बीमारी निकलती है।


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तजुर्बा इंसान को गलत फैसलों से बचाता हैं
✔लेकिन तजुर्बा भी गलत फैसलों के  बाद ही आता हैं.

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मुझे आजमाने वाले शख्स तेरा शुक्रिया,,,
मेरी काबिलियत निखरी है तेरी हर आजमाइश के बाद,,,

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आँखों मे प्यास हुआ करती थी... दिल में तुफान उठा करते थे..।
लोग आते थे गज़ल सुनने को... हम तेरी बात किया करते थे..।
सच समझते थे सब सपनो को.. रात दिन घर में रहा करते थे..।
किसी विराने में तुझसे मिलकर... दिल में क्या फुल खिला करते थे..।
घर की दिवार सजाने की खातिर .. हम तेरा नाम लिखा करते थे..।
कल तुझ को देखकर याद आया... हम भी महोब्बत किया करते थे...।
हम भी महोब्बत किया करते थे...

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ना इश्क का शौक है, 
न मोहब्बत करते है.. 
खुदा के बन्दे है, 
बस बन्दगी करते है.. 
कभी गम हो तो हमें याद करना
दर्द गिरवी रखते है और
ख़ुशी उधार देते है ।।।

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यूँ तो कई बार भीगे बारिश में,
मगर ख्यालों का आँगन सूखा ही रहा,
जब आँखों की दीवारें गीली हुई
उसकी यादो से,
तब ही जाना हम ने बारीश क्या होती है

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चांद को देखो कितना मिलता है हम दोनो से.
तुझ जैसा हसीन और मुझ जैसा तनहा.

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अब तो मुहब्ब्त भी सरकारी नौकरी जेसी लगती है ,
कम्भख्त हमारे जैसे गरीबो को तो मिलती ही नहीं..!!!

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इस दुनिया में कुछ अच्छा रहने दो,
मुझ जैसे बच्चों को बस, बच्चा रह ने दो …

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“रस्मों रिवाज की जो परवाह करते हैं,
प्यार में वो लोग गुनाह करते हैं
इश्क वो जुनून है जिसमें दीवाने
अपनी खुशी से खुद को तबाह करते हैं।

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ये आरज़ू थी कि ऐसा भी कुछ हुआ होता;
मेरी कमी ने तुझे भी रुला दिया होता;

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मैं लौट आता तेरे पास एक लम्हे में;
तेरे लबों ने मेरा नाम तो लिया होता!

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आइना देखा जब ,
तो खुद को तसल्ली हुई,
ख़ुदग़र्ज़ी के ज़माने में भी कोई तो जानता है हमें……
नमक तुम हाथ में लेकर, सितमगर सोचते क्या हो,,
हजारों जख्म है दिल पर, जहाँ चाहो छिड़क डालो.

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वो रोई तो जरूर होगी खाली कागज़ देखकर..
ज़िन्दगी कैसी बीत रही है पूछा था उसने ख़त में…
काश आंसुओ के साथ यादे भी बह जाती …
तो एक दिन तस्सली से बैठ के रो लेते…

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लोग कहते हैं कि वक़्त किसी का ग़ुलाम नहीं होता,
फिर ‘तेरी मुस्कराहट’ पे वक़्त क्यूँ थम सा जाता है…!!!

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हम ना बदलेंगे वक्त की रफ़्तार के साथ ,
हम जब भी मिलेंगे अंदाज पुराना होगा ।

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हजार गम मेरी फितरत नही बदल सकते ;
क्या करू मुझे आदत हे मुस्कुराने की ।

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सिमट गया मेरा प्यार भी चंद अल्फाजों में,
जब उसने कहा मोहब्बत तो है पर तुमसे नहीं…

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 ये दिल में लहर प्यार की जो उठ रही है ,
यार एक दिन तो किनारा मिल ही जायेगा …

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 चलो सो जाते है अब किसी सच क़ी तलाश मे ,
रही साँसे तो सुबह फिर इस
झूठी दुनीया का दीदार करना है..

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नफरत मत करना मुझसे बुरा लगेगा......
बसप्यार से कह देना....अब तेरी जरूरत नही ंहै;!!!!!

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मुझे अपने किरदार पे इतना तो यकिन है....
कोई मुझे छोड तो सकता है मगर भुला नही सकता.,.


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कोई मुझे भी पत्थर सा दिल ला दो यारों
आखिर मुझे भी इंसानो की बस्ती में ही जीना है...!!!

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निभाते नहीं है लोग आजकल…!
वरना…
*इंसानियत* से बड़ा रिश्ता कौन सा है...


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कौन करता है इस दौर में मुद्दतों तक इन्तजार 
किसी का...😒
लोग हर रात के साथ ख़्वाब बदल  लेते हैं...!!! 💭

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नफरत मत करना मुझसे बुरा लगेगा......बसप्यार से कह देना....अब तेरी जरूरत नहीं है;!!!!!

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नायाब हीरा बनाया है 
रब ने हर किसी को.....,,
.पर चमकता वहीं है 
जो तराशने जाने के  दर्द से गुज़रता है....!!"

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 बुराई कैसी भी हो, उसका अंतिम संस्कार अच्छाई ही करती है ।
काबिल लोग न तो किसी को दबाते है और न ही किसी से दबते है ।
हँसता हुआ चेहरा आपकी शान बढाता है मगर हँसकर किया हुआ कार्य आपकी पहचान बढाता है ।

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एक शब्द है ( मोहब्बत )
इसे कर के देखो तुम
तड़प ना जाओ तो कहना,
एक शब्द है ( मुकद्दर )
इससे लड़कर देखो तुम
हार ना जाओ तो कहना,
एक शब्द है ( वफ़ा )
ज़माने में नहीं मिलती कहीं
ढूंढ पाओ तो कहना,
एक शब्द है ( आँसू )
दिल में छुपा कर रखो 
तुम्हारी आँखों से ना निकल जाए तो कहना,
एक शब्द है ( जुदाई )
इसे सह कर तो देखो
तुम टूट कर बिखर ना जाओ तो कहना,
एक शब्द है ( ईश्वर )
इसे पुकार कर तो देखो
सब कुछ पा ना लो तो कहना....

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हौसलें हो अगर बुलंद तो मुट्ठी में हर मुकाम है,
मुश्किलें और मुसीबतें तो जिंदगी में आम हैं..-



Monday, 11 April 2016

Ashiq Pyar Romance Shayri for girlfriend boyfriend

Ashiq Pyar Romance Shayri for girlfriend boyfriend 

आज कल की दुनिया में शरीफ,, सच्चे और
प्यारे दोस्त मिलना बहुत ही मुश्किल है
मैं खुद हैरान हूँ कि तुम लोगों ने मुझे ढूढ़ कैसे लिया?

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नाराज़गी से लेकर रजाबन्दी तक
 तेरी हर एक अदा लाजबाव है

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कौन समझ पाया है आज तक हमें,
हम अपने हादसों के इकलौते गवाह हैं !!

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नज़र झुका के जब भी वोह गुजरे हैं करीब से ,
हम ने समझ लिया कि आदाब अर्ज़ हो गया !!

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बहुत खूबसूरत है ना वहम ये मेरा...
कि तुम जहाँ भी हो सिर्फ मेरे हो.....iii

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कौन पूछता है,
पिंजरे में बंद पंछियों को,
याद वही आते हैं, जो उड़ जाते हैं...

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कितनी छोटी सी दुनिया है मेरी..!!
एक मै और एक यादे तेरी..!!

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मुस्कुरा कर जो देखो तो सारा जहां हसीन दिखता है
... वरना भीगी आंखों से तो आईने में अपना चेहरा भी धुंधला नज़र आता है।

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‬तुमसे बिछड़े तो मालुम हुवा की मौत भी कोई चीज़ हे
ज़िदगी तो वोह थी जो हम तेरी मेहफिल में गुजार आये।

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मुड़े-मुड़े से हैं, 
किताब-ए-इश्क़ के पन्ने,
ये कौन है, 
जो हमे हमारे बाद पढ़ता है.......

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अगर मैं भी मिजाज़ से पत्थर होता..
तो खुदा होता या तेरा दिल होता....!

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अगर होता यकीं के तुम मिलने आओगे ख्वाब में तो,
वफ़ा की कसम आँखों में हम गुलाब की पत्तिया सजाकर सोते..!


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हम भी  आजकल  खुशफहमियों  में जीते  हैं...
इक  हिचकी  भी  आती है तो शुक्रिया  अदा  करते  हैं....

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अच्छा दोस्त जिंदगी को जन्नत बनाता है...!!!
इसलिए मेरी कद्र किया करो
  वर्ना फिर कहते फिरोगे     
  "बहती हवा सा था वो;
यार हमारा था वो; कहाँ गया उसे ढूढों!"

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बहुत अजीब हैं ये बंदिशें मोहब्बत की;
कोई किसी को टूट कर चाहता है;
और कोई किसी को चाह कर टूट जाता है।

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खूबिओं से नहीं होती मोहब्बत भी सदा,
कमियों से भी अक्सर प्यार हो जाता है” !!

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खवाहिश नही मुझे मशहुर होने की….
तुम मुझे पहचानते हो, बस इतना ही काफी है..

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न जाहिर हुई तुमसे, न बयान हुई हमसे।
बस सुलझी हुई आँखो मेँ, उलझी रही मोहब्बत॥

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तनहा रहेने का भी अपना मज़ा है दोस्तों…….
यकीन होता है की कोई छोड़कर नहीं जायेगा,
और उम्मीद नहीं होती किसी के लौट आने की…!!

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सुना है…!
मोहब्बत की तलाश मैं निकले हो ‘तुम…’
अरे ओ पागल…?
मोहब्बत खुद तलाश करती है जिसे बर्बाद
करना हो?

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हम ने एक असूल पे सारी उम्र गुज़ारी है;
जिस को अपना जान लिया फिर उस को परखा नहीं..

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फर्क बस अपनी अपनीसोच का है….
वर्ना दोस्ती भी मोहब्बत से कम नहीं होती….!!

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तन्हाई में भी कहते है लोग,
जरा महफ़िल में जिया करो.
पैमाना लेके बिठा देते है मैखाने में,
और कहते है जरा तुम कम पिया करो….

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मैं हूँ, दिल है, तन्हाई है
तुम भी होते, अच्छा होता..

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“दोनों आखों मे अश्क दिया करते हैं
हम अपनी नींद तेरे नाम किया करते है
जब भी पलक झपके तुम्हारी समझ लेना
हम तुम्हे याद किया करते हैं ”

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अब सज़ा दे ही चुके हो तो मेरा हाल ना पूछना,
गर मैं बेगुनाह निकला तो तुम्हे अफ़सोस बहुत होगा…

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सोचता हूं क्या उसे नींद आती होगी..
या मेरी तरह सिर्फ अश्क बहाती होगी..
वो मेरी शक्ल मेरा नाम भुलाने वाली..
अपनी तस्वीर से क्या आंख मिलाती होगी…..

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कुछ ठोकरों के बाद समझदार हो गए,
अब दिल के मशवरों पर अमल नहीं करते..

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हवा का झौंका था शायद
खिडकी कोई खुली रह गई

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क्या अजीब सबूत माँगा है उसने मेरी मोहब्बत का……
मुझे भूल जाओ तो मानू की तुम्हे मुझसे मोहब्बत है……..!!!!!!

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तड़प के देखो किसी की चाहत में, तो पता चलेगा, कि इंतजार क्या होता है,
यूं ही मिल जाए, कोई बिना चाहे, तो कैसे पता चलेगा, कि प्यार क्या होता है.

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बर्बाद कर दिया दोनों की लड़ाई ने मुझे ।                                               ना आशिक हार मानता है ना दिल शिकस्त का आदी है ।।
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एक शब्द है (मुकद्दर)
इससे लड़कर देखो तुम
हार ना जाओ तो कहना..

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मैं बोलता गया हूँ.... वो सुनता रहा ख़ामोश
ऐसी भी मेरी हार, हुई है कभी कभी

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सामने आई है रिश्तों की हकीकत जब से ,
हम दुआ मांग रहे है के अकेले हो जाये ...

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तुम्हारा सिर्फ़ हवाओं पर शक़ गया होगा
चिराग ख़ुद जल-जल के थक गया होगा

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“गुमराह करते तो हम भी आरजू होते किसी की,
ख़ता यही हुई की दिल को खोल के रख दिया...!”

--

चाहने वालो को नही मिलते चाहने वाले.!
हमने हर दगाबाज़ के साथ सनम देखा है..!!


Thursday, 7 April 2016

hindi shayari on love

hindi shayari on love

सोचते हैं सीख लें हम भी बेरुखी करना;
प्यार निभाते-निभाते लगता है हमने अपनी ही कदर खो दी।

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काश तेरे दिल पे होता इक दरवाजा ………
अंदर जा कर कुंडी लगा देते सदा के लिये……

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रात आधी से ज़्यादा गई थी सारा आलम सोता था 
नाम तेरा ले लेकर कोई दर्द का मारा रोता था
तारे अक्सर डूब चले थे, रात में रोने वालों को 
आने लगी थी नींद- सी कुछ दुनिया में सवेरा होता था

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जिसको एहसासे ग़म नहीं होगा,
संग होगा सनम नहीं होगा !
यूं अचानक तेरे बिछड़ने का,
ग़म तो मुझ को भी कम नहीं होगा ! 
तुम ना समझोगे मेरे सर का जुनूं,
टूट जाएगा ख़म नहीं होगा !

--

गिला भी उनसे होते है जिनसे शिकायत होती है ,
खफा भी उनसे होते है जिनसे मौहब्बत होती है !

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रुठ जाता हूं तुझसे 
मैं तुझी को मनाने के लिए
दूर जाता हूं तुझसे
जराऔर पास आने के लिए
तुझे क्या लगता है 
मुझे जीतना नही आता.???
मैं हार जाता हूं अकसर 
तुझी को जीत जाने के लिए

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किसी की अर्थी यात्रा मैं जाओ तो यह मत समझना कि आप उसे उसकी मंजिल पर ले जा रहे है बल्कि यह समझना की अर्थी पर लेटा हुआ इंसान मुर्दा हो कर भी तुम्हें तुम्हारी मंजिल दिखाने ले जा रहा है
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जादू आता है तुम्हे या किसी और इल्म मे माहिर हो ॥
हमारे दिल पे कब्जा किसी आम शक्स का काम नही

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वादे पे वो ऐतबार नहीं करते,
हम जिक्र मौहब्बत सरे बाजार नहीं करते,
डरता है दिल उनकी रुसवाई से,
और वो सोचते हैं हम उनसे प्यार नहीं करते..,..!

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मत छेड उन तारो को 
साज फिर बज उठेगा 
उसी सरगम की तलाश में 
दिल बेवजह भटकेगा

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सोया तो जाने कब से हूं 
हमें भी प्यार से जगाये कोई

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आओ चुन कर रखें कुछ बेर हम भी 
कभी तो राम आयेगें मेरे यहां

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बेर कैसे होते है “शबरी” से पूछो,
राम जी से पूछोगे तो मीठा ही बोलेंगे !!”

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कोई अब जगाती हैं इन आँखों को रातों में…
हमने सोने का वक़्त अब बदल लिया हैं…

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मुकाम ऐ महोब्बत 👉तूने समझा ही नहीं…
वरना जहाँ तक है 👉तेरा साथ, वही तक होगी ज़िंदगी मेरी

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छोड़ दी सारी खाव्हिश जो तुझे पसंद ना थी ए दोस्त….
तेरी दोस्ती ना सही पर तेरी ख्वाहिश आज भी पूरी करते है..!!

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जिसको एहसासे ग़म नहीं होगा,
संग होगा सनम नहीं होगा !
यूं अचानक तेरे बिछड़ने का,
ग़म तो मुझ को भी कम नहीं होगा ! 
तुम ना समझोगे मेरे सर का जुनूं,
टूट जाएगा ख़म नहीं होगा !

--

ये इत्तेफ़ाक़ नहीं कि आज हम तनहा है ……….
नाकाम होने के लिए भी बड़ी मशक्कत कि है हमने ……

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मुझे तो बस हर ख्वाहिश को अब तक अधूरा पाने की आदत सी हो गई है

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शुक्रगुजार हूं तेरा 
कोई तमन्ना तो पूरी की

--

वो चुपके से जरूर आएगी मिलने मुझसे….
हकीकत नही तो “सपने” मे ही सही…

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ए इश्क…मुझको कुछ और जख्म चाहियें…!!!
अब मेरी शायरी में वो बात नहीं रही…!!

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हसरत दिल की जाने कब पूरी होगी 
लगता है मरने तक प्यास अधूरी ही होगी

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न जाने किस बात पे नाराज़ है
वो हमसे.....!!
ख्वाबों में भी मिलती है,
तो बात नहीं करती.....

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इतनी बदसलूकी ना कर ऐ जिंदगी...
हम कौन सा यहाँ बार बार आने वाले है.

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वक़्त से कहना ....
यूँ न झांके मेरी जिंदगी की झोपडी में, 
मेरी कुछ ख्वाहिशें ....
बेलिबास ही टहला करती हैं..!!!!!

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यूँ तो तैरने मे हो गया हूँ माहिर मैं,
फिर भी डूब जाता हूँ अक्सर तुम्हारे ख्यालो में ..!!

--

" इज़ाज़त हो तो मांग लूँ तुम्हें... 
सुना हैं तक़दीर लिखी जा रही हैं...


--

बङे बेताब थे वो मोहब्बत करने को,
जब मैने भी कर ली तो उन्होने शौक बदल लिया...

--

कभी मुस्कुराती आँखें भी कर देती हैं, कई दर्द बयां,
हर बात को रोकर ही बताना जरूरी तो नहीं ......

--

अकेले बैठोगे, तो मसले जकड लेंगे.... 
ज़रा सा वक़्त सही , दोस्तों के नाम करो...!!

--

चलो सो जाते हैं तमाम हसरतें समेट कर,
रहा मेरा साँसों का रिश्ता शरीर से तो कल फिर मिलते हैं...

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मैंने रब से कहा वो चली गयी मुझे छोड़कर,
उसकी जाने क्या मज़बूरी थी;
रब ने मुझसे कहा इसमें उसका कोई कसूर नहीं,
यह कहानी मैंने लिखी ही अधूरी थी।

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मैं नाजुक बर्फ का एक टुकड़ा ; तुम
रखकर भूल गये कहीं ....

...
मैं कतरा-कतरा पिघलता रहा ; तुम
मेरा दर्द क्या जानो ........

--

कहीं एक आख़िरी हद है..जहाँ दिल को बिखरना है,
वहीं से फिर मुझे अपना..सफ़र आग़ाज़ करना है,
मैं सूरज हूँ अंधेरों से..मुझे क्या फ़र्क़ पड़ता है,
जहाँ मैं आज डूबा हूँ...वहीं से कल मुझे उभरना है....

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मेरी तो बस एक छोटी सी ख्वाहिश हैं
की 
तुम्हारी कोई ख्वाहिश अधूरी ना रहे

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चन्द लम्हें जो गुज़ार आया हूँ 
अंजानो के साथ. . 
.दिल नहीं लगता मेरा.
..अब जाने पहचानों के साथ...

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गुज़र गया आज का दिन भी पहले की
तरह, न हमको फुर्सत मिली न उन्हें ख्याल आया...

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दोस्ती से प्यारा कोई रिश्ता नहीं होता, दुनियाँ में हर कोई इसे मिटा नहीं सकता, 
हमारा तो आपसे वो रिश्ता है, 
जिसे दुनियाँ तो क्या खुदा भी मिटा नहीं सकता..

--

लगता है मेरी नींद का किसी के साथ चक्कर चल रहा है,
सारी सारी रात गायब रहती है !!!

hindi shayari on love

Monday, 21 March 2016

दोस्ती Hindi Love and Pyar Shayri

Hindi Love and Pyar Shayri दोस्ती Shyari 


Hindi Love and Pyar Shayri : मेरी आंखो मे ना खोजा करो तुम खुद को..!! क्योकि 
मेरे दिल मे तुम रहते हो खवाब की तरह ....!!!



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इस उम्मीद से मत फिसलो, 
कि तुम्हें कोई उठा लेगा
सोच कर मत डूबो दरिया में, 
कि तुम्हें कोई बचा लेगा
ये दुनिया तो एक अड्डा है तमाशबीनों का दोस्त,
गर देखा तुम्हें मुसीबत में तो, 
यहां हर कोई मज़ा लेगा...

---


दोस्ती से कीमती..   
दोस्ती से कीमती कोई जागीर नही होती;    
दोस्ती से खूबसूर्त कोई तस्वीर नही होती;     
दोस्ती यूँ तो कचा धागा है मगर;    
इस धागे से मजबूत कोई ज़ंजीर नही होती!

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लिखी कुछ शायरी ऐसी तेरे नाम से
कि....
जिसने तुम्हे देखा भी नही, 
उसने भी तेरी तारीफ कर दी..

--

"इस होली मेँ ऐसा 'गुलाल' हो जाये...!
जिससे अपनी 'रुह' तक लाल हो जाये...!!
तुझमेँ दिखे तो सिर्फ़ 'राधिका' दिखे...!!!
मेरा रोम-रोम 'गोपाल' हो जाये"....!!!!

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" कान्हा के होठों पे देखो क्या खुशनुम़ा है बंशी ,
  बंशी पे होठ फ़िदा हैं या होठों पे फ़िदा है बंशी "|
    राधे राधे जय श्री राधे >>>
--

रूह मेरी.. इश्क़ तेरा,
जाँ मेरी... जिस्म तेरा,,
जन्नत मिले .. पहलु में तेरे,
बाहें तेरी .. और सुकून मेरा,,|

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आँखों से दूर दिल के करीब था,
में उस का वो मेरा नसीब था.
न कभी मिला न जुदा हुआ,
रिश्ता हम दोनों का कितना अजीब था.

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खुदा को याद करूँ यां याद करूँ तुम्हे 💕
ज़र्रे ज़र्रे में वो है और कतरे कतरे में तुम...!!!

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कुछ हँस के बोल दिया करो,
कुछ हँस के टाल दिया करो,
यूँ तो बहुत परेशानियां है तुमको भी मुझको भी,
मगर कुछ फैंसले वक्त पे डाल दिया करो ।।

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खुल जाता है उस की यादों का बाज़ार सुबह सुबह,
बस मेरा दिन इसी रौनक में गुज़र जाता है ।

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आँखों से दूर दिल के करीब था,
में उस का वो मेरा नसीब था.
न कभी मिला न जुदा हुआ,
रिश्ता हम दोनों का कितना अजीब था.

--

खुदा को याद करूँ यां याद करूँ तुम्हे 💕
ज़र्रे ज़र्रे में वो है और कतरे कतरे में तुम...!!!

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रात गुम सुम है मगर खामोश नही,
कैसे कह दूँ आज फिर होश नही,
ऐसे डूबा हूँ तेरी आँखों की गहराई में,
हाथ में जाम है मगर पीने का होश नही।

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शायरी कहां वो बिखरे अल्फाज़ थे 
तेरी वाह वाही ने संवारा था जिनको 

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सुलझ जायेगी तो सिमटने लगेगी..
चल कुछ बातें उलझी ही रहने दे
न वज़ह ढूंढ , न अंजाम तक जा
बस इस कारवां को यूं ही बहने दे...

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"रब"  ने नवाजा   हमें  जिंदगी देकर;
और  हम  "शौहरत"  मांगते   रह   गये;
जिंदगी  गुजार  दी  शौहरत  के  पीछे;
फिर   जीने   की  "मौहलत"   मांगते   रह गये।
ये   कफन ,  ये जनाज़े,   ये   "कब्र" सिर्फ  बातें   हैं मेरे   दोस्त,,,
वरना   मर   तो   इंसान   तभी   जाता  है जब  याद  करने  वाला  कोई   ना हो...!!

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ये  समंदर   भी  तेरी   तरह.  खुदगर्ज़ निकला, 
ज़िंदा  थे  तो  तैरने  न  दिया और मर  गए   तो   डूबने  न  दिया . . 
क्या  बात   करे   इस   दुनिय  की 
"हर  शख्स के   अपने  अफसाने  हैं"
जो   सामने  हैं  उसे   लोग  बुरा   कहतें  हैं,
जिसको देखा  नहीं   उसे   सब   "खुदा"  कहते   हैं.!!!

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नसीब नसीब की बात होती है...
कोई नफरत देकर भी बेपनाह प्यार पाता है...
और कोई बेपनाह प्यार देकर भी यहाँ...
बस खाली हाथ रह जाता है...


Thursday, 17 March 2016

Hindi Pyaar Love Mohabbat Shayari

Hindi Pyaar Love Mohabbat Shayari

Hindi Pyaar Love Mohabbat Shayari : पता है तुम्हारी और हमारी
मुस्कान में फ़र्क क्या है?
तुम खुश हो कर मुस्कुराते हो,
हम तुम्हे खुश देख के मुस्कुराते हैं………

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कैदी हैं सभी यहाँ.
कोई ख्वाबों का तो कोई ख़्वाहिशों का.... 

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बिखरे पडे लफ्जों को समेटा चाहता था 
तरतीब से  फिर सजाना चाहता था
बगैर तेरे दीदार के ये भी इधर उधर के हो लिये 



 बडे शातिर हो गये हैं लफ्ज आजकल
निकलते मेरी कलम से हैं 
तारीफ तेरी करते हैं

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आईना सच को छुपा ना पायेगा 
खुद को भी ना जताई जो बात, वो बात भी बता जायेगा

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कहते है दिल की बात हर किसी को कही नहीं जाती 
अपनों को भी बताई नहीं जाती पर दोस्त तो आईने होते हैं और आईने से कोई बात छुपाई नहीं जाती.

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 पलकों की हद को तोड़ कर दामन पे आ गिरा,
एक अश्क़ मेरे सब्र की तौहीन कर गया….

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रिश्तों का बनना बिगडना कहां अपने हाथ है 
ये ताना बाना तो बुनता है 
सितारों से ऊपर बैठा कोई

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शायरी मे सिमटते कहाँ हैँ दिल के दर्द दोस्तो
ये तो अलफाजों को तरबियत देने का बहाना है

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जो कोई समझ न सके वो बात हैं हम,
जो ढल के नयी सुबह लाये वो रात हैं हम,
छोड़ देते हैं लोग रिश्ते बनाकर,
जो कभी न छूटे वो साथ हैं हम !!

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कहने को बहुत छोटी बात है
    अगर समझ सको तो ..
बात करने से, ही बात बनती है...
बात न करने से, बातें बनती हैं...

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न तेरी अदा समझ में आती है ना आदत...
तू हर रोज़ नयी सी ,मैं हर रोज़ वही उलझा सा..

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ये सच है जी तेरे बिन बहलता नहीं है 
मैं ठहर भी जाऊं, वक्त ठहरता नहीं है....!!!

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ख्वाबों में हीं मुझसे मिलने आ जाओ तुम
तेरी बहुत शिकायतें करनी है, मुझे तुमसे…

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न तेरी अदा समझ में आती है ना आदत...
तू हर रोज़ नयी सी ,मैं हर रोज़ वही उलझा सा..

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ये अहसासों क़े रिश्ते दिल से जुड़े हैं,
इसलिए दिल कही धड़कता है आवाज़ कही आती है...

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मन परिंदा है
रूठता है
उड़ता है
दूर..कहीं दूर
फिर रूकता है
ठहरता है, सोचता है, आकुल हो उठता है
नहीं मानता
और लौट आता है
तुम्हारे पास

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चलो मिल ही लेते हैं", फिर कभी न मिलने को;
यही ख्वाहिश बची है दिल में, इक आखिरी ख्वाहिश की तरह!!....

Wednesday, 16 March 2016

Life Dard Friendship Dosti Hindi Shayari

Hindi Shayari on life Dard Love friendship dosti sad

Hindi Shayari on life Dard Love friendship dosti sad : शिकायत करने से खामोश रहना बेहतर है, क्यूंकि जब किसी को फर्क नही पड़ता तो शिकायत कैसी ??? ☹☹😷 सही कहा ना दोस्तों  

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मुझे रिश्तो की लंबी कतारोँ से मतलब नही,
कोई दिल से हो मेरा, तो एक शख्स ही काफी है

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तन्हाई अकेलेपन की मोहताज़ नहीं होती,
भीड़ ज़्यादा हो तो अपना वजूद तन्हा लगने लगता है.

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कितनी भी शिद्दत से क्यूँ ना निभाओ रिश्ता,
बदलने वाले फिर भी बदल ही जाते है !!

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अपनी तक़दीर में तो कुछ ऐसा ही सिलसिला लिखा है,
किसी ने वक़्त गुजारने के लिए अपना बनाया,
तो किसी ने अपना बना कर वक़्त गुज़ार लिया……..

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मैं अभी तक समझ नहीं पाया तेरे इन फैसलो को ऐ खुदा,
उसके हक़दार हम नहीं या हमारी दुआओ में दम नहीं

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मोहब्बत भी चाहते हो और मुक्म्म्ल वफ़ा भी,,
आप तो धुंए के बादलों से बरसात माँग रहे हो...!!!

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समुंद्र की तरफ जाना हो तो जरा सब्र रख कर जाना...
जहाज बताते है कि "समुंद्र "मे छुपने के ठिकाने नही होते 

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तन्हाईयाँ कुछ इस तरह से डसने लगी हैँ मुझे..
मै आज अपने पाँवो की आहट से ही डर गया..

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बिछड़ने वाले तेरे लिए एक "मशवरा" है ,...
कभी हमारा "ख्याल" आए, तो अपना 'ख्याल' रखना....

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अपना होगा तो सता के मरहम देगा,
जालिम होगा अपना बना के जख्म देगा,
समय से पहले पकती नहीं फसल,
अरे बहुत बरबादियां अभी मौसम देगा|

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छोङ दिया सबको बिना वजह तंग करना…,
जब कोई अपना समझता ही नही…,
तो उसे अपनी याद क्या दिलाना

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शिकायत करने से खामोश रहना बेहतर है, 
क्यूंकि 
जब किसी को फर्क नही पड़ता तो शिकायत कैसी ??? ☹☹😷
      सही कहा ना दोस्तों...

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मुहब्बत हर दिल को आजमाती है.....
किसी से रूठ जाती है.....
और किसी पर मुस्कुराती है.....
ये खेल ही ऐसा है मुहब्बत का.....
किसी का कुछ नहीं लेती.....
और किसी का सब कुछ ले जाती है.....

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सुना  है होली आ रही ऐ दिल सम्हल कें रहना ...
क्यूंकि लोग गालो पे रंग लगाकर दिल का रंग चुरा लेते है...

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यूँ तो कहने को बहुत सी बातें हैं इस दिल में ...........! 
कुछ लफ़्जों में कह दूँ....
मेरी आखिरी ख्वाहिश हो तुम

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बस दो अदायें उन की बेताब कर गयी...
अंदाज नज़रे मिलाने का और नज़रअंदाज़ करने का

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मुझे मंज़ूर थे वक़्त के हर सितम मगर ,
तुमसे बिछड़ जाना, ये सज़ा कुछ
ज्यादा हो गई...

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फकीर मिज़ाज़ हूँ मैं, अपना अंदाज औरों से जुदा रखता हूँ..
लोग मंदिर मस्जिदों में जाते है, मैं अपने दिल में भगवान को रखता हूँ..

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रंगों का कारोबार हमने खूब किया
पर कभी मोहब्बत का रंग न बेच पाये ..

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जाने क्यूँ महसूस हो रहा है.!!
मुझ़े महसूस कर रहे हो तुम

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तेरी नजरों का नजारा जो देखा एक नजर 
दिल हुआ आवारा नहीं भूलता अब वो मंजर

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है दफ़न मुझमे कितनी रौनके मत पूछ,
ऐ दोस्त…..
हर बार उजड़ के भी बसता रहा वो शहर हूँ मैं!!

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इन नजरों को सलाम भेजा है 
यूं ना समझना किसी को कलाम भेजा है

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ये रस्म,
ये रिवाज,
ये कारोबार वफ़ाओं का
सब छोड़ आना तुम...!!
मेरे बिखरने से जरा  पहले
लौट आना तुम ...!!!

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देख के ह़या से सिमटना तेरा 
ना जाने कितनी बार बिखरा हूं मैं

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मिली जब जब तुझसे ये नजर 👀
हर बार तब तब निखरा हूं मैं

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नसीब की बारिश ,,
कुछ इस तरह से होती रही मुझ पर ,,
ख्वाहिशें सूखती रही और 
पलकें भीगती रही !!

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हस्तियाँ मिट गयी नाम कमाने में, उम्र बीत गयी खुशियाँ पाने में, एक पल में दूर ना हो जाना हमसे, हमें तो सालों लगे है, आप जैसा दोस्त पाने में ..

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देख के ह़या से सिमटना तेरा 
ना जाने कितनी बार बिखरा हूं मैं 🌺
🌺मिली जब जब तुझसे ये नजर 👀
हर बार तब तब निखरा हूं मैं 🌺
🌺तेरा सिमटना, मेरा बिखरना, नजरों में तेरी निखरना मेरा
ना जाने कितनी नजरों में अखरा हूं मैं 

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मुतमा-इन ज़िन्दगी से, कुछ ऐसे हुए जाते हैं
क़िस्मत के फटे चीथड़े, बेबस हो सीये जाते हैं

तेरा वजूद होगा, मेरे लिए भी लाज़िम 
नामालूम सी ज़िन्दगी से, तन्हाई पिए जाते हैं

बर्क-ए-नज़र कितनी, गिरतीं रहीं हैं सर पर
बेअसर सर को अब तो, बा-असर किये जाते हैं

इक आरज़ू तो है ही, इक बहार खुल के आये  
इस एक ऐतमाद पर, हम गुज़र किये जाते हैं

ग़र दुआ भी देंगे तुमको, तो कितनी दुआयें देंगे
साँसों के साथ उम्र भी, अब नज़र किये जाते हैं 

हम वो नदी हैं जिसके, किनारे ग़ुमगश्ता हो गए 
उन किनारों की ख़ोज में हम लहर लिए जाते हैं 

हमको क्या पड़ी 'अदा', बहारें आये-जाएँ
मौसम-ए-रूह की हम, बस क़दर किये जाते हैं 
🌺🌺🌺🌺🌺🌺🌺

मुतमा-इन = संतुष्ट 
बर्क़-ए-नज़र = नज़रों की बिजलियाँ  
ऐतमाद = विश्वास 
लाज़िम = महत्वपूर्ण, आवश्यक 
ग़ुमगश्ता=खोया हुआ 

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ये रोज़-रोज़ की प्रार्थना
हर रविवार का सत्संग 
और हर दिन तम्बाखू खाना  
आदत में ही शुमार हैं 
एक रह जाए तो मन को कष्ट होता है
और दूसरे से तन को  । 
आदत कैसी भी हो 
आदत ही होती है
अगर शान्ति चाहिए तो 
आदत से बाहर निकल कर 
कुछ सृजन करो 
शब्द अपने में कुछ नहीं होते 
उनको जीवित तुम करते हो 
अगर ऐसा नहीं होता तो 
'मरा' 'मरा' कहने वाला 
भक्त क्यूँ कहाता  ?
भगवान् भी तभी तक है 
जब तक भक्त रहता है 
और 
गंगा भी तभी तक गंगा है 
जब तक वो सागर में नहीं समाती .....

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तेरा जमाल मुझे क्यूँ, हर सू नज़र आए
इन बंद आँखों में भी, बस तू नज़र आए
सजदा करूँ मैं तेरी, कलम को बार-बार
हर हर्फ़ से लिपटी मेरी, आरज़ू नज़र आए
गुज़र रही हूँ देखो, इक ऐसी कैफ़ियत से
ख़ामोशियों का मौसम, गुफ़्तगू नज़र आए
फासलों में क़ैद हो गए, ये दो बदन हमारे 
पर उफ़क से ये ज़मीं क्यूँ, रूबरू नज़र आए
वो संदल सा गमके और कुंदन सा दमके 
उसकी बेक़रार सी आँखें, क्यूँ पुर-सुकूँ नज़र आये 

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